खोखला कर रहा ये अकेलापन,
घुट रहा , चीख रहा , ये अधूरापन !
सुनो ना , देखो ना… मेरी दस्तक अनसुनी क्यूँ है ?
मैं अनदेखी , बाकी सबकी खुशियाँ दुगुनी चौगुनी क्यूँ है ?
अंधेर बचपन …. डर का रास्ता था ,
आज अकेलापन … शायद यही वो दास्ताँ था ,
साथ की जरूरत , पुकारती है ,
जिंदगी के कांटे , मारती है ,
क्यूँ ? क्यूँ ? प्रश्नों का सैलाब … रुकता नहीं ,
मुझे पा के किसी को उत्सुकता नहीं । @surbhisays