क्यूँकी वो कहते है ना कि

कुर्बानी ऐसी करो की

पीछे मुड़ने में दर्द ना हो ,

यूँ उन जानी पहचानी जगहों के गुजरने पर

धड़कने सर्द ना हो ,

दिखाई देती है ना वो गुफ़्तगू की झलकियाँ ,

आँसुओं से ऐसे मुक़म्मल करो की

नजरे साफ , इज़हार-ए-मोहब्बत मे इसबार

सुकून के पल ही पल हो। @surbhisays

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