सोचा था हम खास बहुत होंगे ,

हमारी सादगी , वास्तविक रूप देख वो उल्लासित होंगे ,

सातवें आसमान पर तैर रही थी ,

लेकिन पता ना था कि धीरे-धीरे गैर हो रही थी !

हम सपने सुहाने भविष्य के सपने देख रहे थे ,

हर एक भावनायें , ज़ज्बात सेक रहे थे !

सोचा था एक दिन बात करते है ,

लेकिन ये सुन

वो हँसे ,

थोड़ा बरसे ,

अपने ज़ज्बात कसे ,

और इस तरह मेरे दिल से दग़ा, फरेबी की जड़े !

टूटा दिल मेरा , अकेलापन समेट रहा था ,

जकड़ कर उसे लपेट रहा था !

अब किसी पर विश्वास करने का मन नहीं करता ,

अंधविश्वास है ये प्यार अब जुड़ने का मन नहीं करता !

काश ये दर्द जल्दी कम हो जाए ,

प्यार से अब मेरे दिल की नजरबंदी हो जाए । @surbhisays

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