होता नहीं अपना कोई , सिर्फ कहने की बात है ,
साधारण को अपनाता न कोई , ऐसे ही हालात है ,
रात की आड़ में , आँखें दर्द कह लेती है ,
चीख-चीख कहती , ” यह जिंदगी बहुत दर्द देती है ”
गला घोंटता अकेलापन , बहुत दर्द देता है ,
ये हारा दिल , हर दिन ताने सेहता है
इस तरह आँसुओं का दर्द , मौन सा बहता है ,
बिखरा पड़ा है ज़ज्बात मेरा , साँसे भीख माँगती है ,
इन्तेज़ार है सिर्फ एक सम्मान का , मौत तक जिसे देख कांपती है । @surbhisays