हर कोशिशें नाकाम है ,
पता नहीं किस्मत का यह कौनसा मुकाम है !
धैर्य की सीमा टूट रही हैं,
भावनाओं की डोर छूट रही है ,
रिश्ता रखना कोई चाहता नहीं ,
सादगी परखना किसी को आता नहीं !
कसूर सिर्फ इतना है कि ,
अकेलापन मासूम सा साथ मांगता है ,
लेकिन दूसरों से अपनापन , अंधकार जागता है । @surbhisays