तैर रहे है सपने सुहाने , हवा में ,
किस्मत कहती पकड़ सको तो जाने !
बिखरते , टूटते , चारों ओर ,
आ गए नजरों की ओर ,
चुभा ऐसा , कोना-कोना
अंधकार जागा , आधा-पौना
अंधी आँखें , टूटा दिल ,
हँसते लोग , वाह! वाह ! इतने काबिल !
आत्मविश्वास दाव पर लगा है ,
किस्मत का ऐलान , ” यही तेरी सज़ा है ! “
अरे! गलती बिना सज़ा कैसे ?
सपने देखा… सब के जैसे !
बोली किस्मत,
“आयेगा वही पास जो सच्चा चाहता तेरा साथ,
समुंदर की नमकीन उम्मीदें , ना देती गिरते हलक को हाथ । ” @surbhisays