एक तरफ तू है ,
एक तरफ मै हूँ ,
एक ही दीवार के नीचे ,
सामने पड़ा गुलदस्ता
बेज़ारी का ,
सँवार रहा गुलदान ,
दिया है तूने हर बार ।
सींच रहे जबरन ,
अखिर दिया तो तूने ही है
तुम्हारी आदत
और मैं सिर्फ कहावत
खिले तन्हाई के गुल
जिधर भंवरे की गुनगुनाहट
देख तेरी मुस्कराहट ,
और मेरे दिल की घबराहट ,
कि क्यूँ ?
एक तरफ़ा रिश्ता प्रश्न चिन्ह लगा जाता ,
कि बिना आग उम्मीद इसे सुलगा जाता । @surbhisays